📞 फोन नंबर क्या है?
– इसका पूरा इतिहास

फोन नंबर क्या है? – इसका पूरा इतिहास
फोन नंबर आज हमारी पहचान का अहम
हिस्सा है। लेकिन इसकी शुरुआत कैसे हुई?
आइए, इसके इतिहास को शुरुआत से समझते हैं।
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1. टेलीफोन का आविष्कार (1876)
टेलीफोन का आविष्कार 1876 में Alexander Graham Bell ने किया।
शुरुआत में जब कोई कॉल करता था, तो एक ऑपरेटर
(Operator) तारों को मैन्युअली जोड़कर कॉल कनेक्ट
करता था। उस समय फोन नंबर नहीं होते थे — लोग नाम से पहचाने जाते थे।
🔄 2. नंबर प्रणाली की शुरुआत (1879 के बाद)
जैसे-जैसे टेलीफोन उपयोगकर्ताओं की
संख्या बढ़ी, नाम से पहचान करना
कठिन हो गया।
1879 में अमेरिका के
शहर लोवेल (Massachusetts) में पहली बार लोगों को नंबर
दिए गए, ताकि ऑपरेटर आसानी से कनेक्शन जोड़ सके। यही फोन
नंबर प्रणाली की शुरुआत थी।
🔢 3. ऑटोमैटिक डायलिंग सिस्टम (1890–1920)
1890 के दशक में
ऑटोमैटिक एक्सचेंज सिस्टम आया, जिससे लोग खुद नंबर डायल कर
सकते थे।
इस सिस्टम को विकसित करने में Almon Brown Strowger का महत्वपूर्ण योगदान था।
उन्होंने "Strowger Switch" बनाया, जिससे ऑपरेटर की जरूरत कम हो गई।
🌍 4. STD और ISD कोड का
विकास
जैसे-जैसे शहर और देश आपस में जुड़ने
लगे, अलग-अलग क्षेत्रों के
लिए कोड बनाए गए।
- STD (Subscriber Trunk Dialing) – शहरों के लिए अलग कोड
- ISD (International Subscriber Dialing) – देशों के लिए अलग कोड
भारत का देश कोड +91 है।
🇮🇳 5. भारत में फोन नंबर का इतिहास
भारत में टेलीफोन सेवा ब्रिटिश काल
में शुरू हुई।
आधुनिक टेलीकॉम विस्तार में Bharat Sanchar Nigam Limited
(BSNL) की बड़ी भूमिका रही।
बाद में निजी कंपनियाँ जैसे Airtel और Reliance Jio के
आने से मोबाइल नंबरों की संख्या तेजी से बढ़ी।
भारत में आज मोबाइल नंबर 10 अंकों का होता है।
📱 6. मोबाइल नंबर क्रांति (1990 के बाद)
1990 के दशक में मोबाइल
फोन आए।
अब हर व्यक्ति के पास अपना व्यक्तिगत नंबर होने लगा।
स्मार्टफोन आने के बाद फोन नंबर केवल
कॉल के लिए नहीं, बल्कि:
- OTP
- बैंकिंग
- सोशल मीडिया
- UPI
- सरकारी योजनाएँ
इन सबके लिए जरूरी हो गया।
💻 7. डिजिटल युग में फोन नंबर
आज फोन नंबर एक डिजिटल पहचान (Digital Identity)
बन चुका है।
यह केवल संपर्क का साधन नहीं, बल्कि ऑनलाइन दुनिया में आपकी एंट्री का
पासवर्ड जैसा है।
🔐 8. सुरक्षा का महत्व
इतिहास के साथ-साथ खतरे भी बढ़े हैं:
- स्पैम कॉल
- फ्रॉड
- OTP स्कैम
इसलिए फोन नंबर की सुरक्षा बहुत जरूरी
है।
📌 निष्कर्ष
फोन नंबर का इतिहास 1876 के टेलीफोन आविष्कार से शुरू होकर आज डिजिटल
पहचान तक पहुंच चुका है।
यह केवल अंकों की श्रृंखला नहीं, बल्कि तकनीकी विकास, संचार
क्रांति और आधुनिक समाज की पहचान का प्रतीक है।
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