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| एक पुराना कुआँ |
“घने जंगल के बीच… एक पुराना कुआँ था।
लोग कहते थे… वहाँ आधी रात को कोई आता है।
वो कोई और नहीं… साँपों की रानी थी।
चाँदनी में उसकी खूबसूरती ऐसी चमकती… जैसे ज़मीन पर उतरा हुआ चाँद।
उसके बाल काले बादलों जैसे…
आँखें… नागिन की तरह गहरी और रहस्यमयी।
हर रात… बारह बजे…
वो कुएँ से बाहर आती…
और जंगल उसके कदमों से जाग उठता।
एक रात…
उसी जंगल से एक राजा का बेटा गुज़रा।
उसने वो मंजर देखा…
और पहली नज़र में ही अपना दिल हार बैठा।
वो धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा…
लेकिन…
सूखी पत्तियों की आहट गूँजी।
नागिन ने पलटकर देखा…
और पलक झपकते ही… वापस अपने कुएँ में समा गई।
राजकुमार वहीं खड़ा रह गया…
प्यार में…
और एक रहस्य में डूबा हुआ।
पर सवाल ये है…
क्या वो फिर कभी लौटेगी?”

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