🇮🇳 भारत में खेती में
टेक्नोलॉजी ज़रूरी क्यों नहीं माना जाता?
कारण, सच्चाई, चुनौतियाँ और
भविष्य की राह
भारत में खेती में टेक्नोलॉजी ज़रूरी क्यों
नहीं माना जाता? | कारण, चुनौतियां
और समाधान
भारत की खेती, किसानों की समस्याएं, कृषि तकनीक, स्मार्ट फार्मिंग, ड्रिप इरिगेशन और
आधुनिक मशीनों के फायदे – जानिए क्यों भारत में टेक्नोलॉजी अभी भी जरूरी नहीं मानी
जाती।
लेकिन जब हम दुनिया के विकसित देशों
की खेती को देखते हैं — जैसे अमेरिका,
इज़राइल, जापान या यूरोप — तो वहाँ खेती पूरी
तरह मशीनों और टेक्नोलॉजी पर आधारित है। वहीं भारत में अभी भी ज्यादातर
किसान पारंपरिक तरीकों से खेती करते हैं।
यही कारण है कि अक्सर सवाल उठता है —
👉 “भारत में खेती में टेक्नोलॉजी को ज़रूरी
क्यों नहीं माना जाता?”
क्या किसान टेक्नोलॉजी नहीं अपनाना
चाहते?
या कोई और वजह है?
या फिर सरकार की कमी है?
या गरीबी और जानकारी की समस्या है?
आज हम इस लेख में इन सभी सवालों का
गहराई से जवाब समझेंगे।
🌱 1. भारत की खेती की
वास्तविक स्थिति
सबसे पहले हमें भारत की खेती की असली
तस्वीर समझनी होगी।
भारत में:
- 80% किसान छोटे और सीमांत किसान हैं
- ज्यादातर किसानों के पास 1–2 एकड़ जमीन ही है
- आय बहुत कम है
- खेती बारिश पर निर्भर है
- मशीनें खरीदने की क्षमता कम है
अब सोचिए —
जब किसान के पास परिवार चलाने के लिए ही पैसे मुश्किल से हों,
तो वह महंगी टेक्नोलॉजी कैसे खरीदे?
यही सबसे बड़ी समस्या है।
🚜 2. टेक्नोलॉजी का मतलब
क्या है खेती में?
कई लोग समझते हैं कि टेक्नोलॉजी का
मतलब सिर्फ ट्रैक्टर है, लेकिन असल में खेती
की टेक्नोलॉजी बहुत बड़ी है।
खेती की टेक्नोलॉजी में शामिल हैं:
- ट्रैक्टर
- हार्वेस्टर
- ड्रिप इरिगेशन
- स्प्रिंकलर सिस्टम
- ड्रोन से दवाई छिड़काव
- सॉइल टेस्टिंग मशीन
- मोबाइल ऐप्स
- वेदर फोरकास्ट सिस्टम
- स्मार्ट सेंसर
- AI आधारित खेती
- ऑनलाइन मंडी (e-NAM)
लेकिन इन सबका उपयोग अभी भी बहुत कम
है।
❓ 3. भारत में
टेक्नोलॉजी ज़रूरी क्यों नहीं माना जाता? (मुख्य कारण)
अब असली सवाल —
किसानों के लिए टेक्नोलॉजी क्यों जरूरी नहीं लगती?
आइए कारण समझते हैं।
🔹 (1) छोटी जमीन – सबसे बड़ी समस्या
भारत में अधिकतर किसान छोटे किसान
हैं।
अगर किसी किसान के पास सिर्फ 1 एकड़ जमीन है तो:
- ट्रैक्टर खरीदना बेकार
- हार्वेस्टर की जरूरत नहीं
- बड़ी मशीनों का फायदा नहीं
ऐसी स्थिति में किसान सोचता है:
👉 "जब हाथ से काम हो जाता है तो मशीन क्यों
लें?"
इसलिए टेक्नोलॉजी जरूरी नहीं लगती।
🔹 (2) पैसे की कमी
टेक्नोलॉजी सस्ती नहीं होती।
उदाहरण:
- ट्रैक्टर = 5–7 लाख
- हार्वेस्टर = 20–30 लाख
- ड्रिप सिस्टम = 50–60 हजार
- ड्रोन = 3–5 लाख
एक गरीब किसान इतना पैसा कहाँ से लाए?
बैंक लोन भी आसानी से नहीं मिलता।
इसलिए किसान टेक्नोलॉजी से दूर रहता
है।
🔹 (3) शिक्षा और जानकारी की कमी
गाँवों में कई किसान:
- ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं
- नई मशीनों से डरते हैं
- मोबाइल ऐप्स का उपयोग नहीं जानते
- इंटरनेट की जानकारी कम है
उन्हें लगता है:
👉 "पुराना तरीका ही सही है"
जानकारी की कमी टेक्नोलॉजी को रोकती
है।
🔹 (4) परंपरागत सोच
हमारे देश में खेती पीढ़ियों से चली आ
रही है।
दादा → पिता → बेटा
सभी एक ही तरीके से खेती करते हैं।
नई चीज़ अपनाने में डर लगता है:
- अगर नुकसान हो गया तो?
- मशीन खराब हो गई तो?
- पैसा डूब गया तो?
इस डर के कारण किसान बदलाव नहीं
चाहता।
🔹 (5) मजदूर आसानी से मिल जाते हैं
भारत में सस्ती मजदूरी उपलब्ध है।
जहाँ मजदूर:
- ₹300–400 में पूरा दिन काम कर देता है
तो किसान मशीन क्यों खरीदे?
विदेशों में मजदूर महंगे हैं, इसलिए मशीन जरूरी है।
भारत में मजदूर सस्ते हैं, इसलिए मशीन जरूरी
नहीं लगती।
🔹 (6) सरकारी योजनाओं की सही जानकारी नहीं
सरकार कई योजनाएँ देती है:
- सब्सिडी
- ड्रिप इरिगेशन सहायता
- मशीनों पर छूट
- किसान क्रेडिट कार्ड
लेकिन:
- जानकारी समय पर नहीं मिलती
- भ्रष्टाचार होता है
- कागजी कार्यवाही ज्यादा होती है
इससे किसान निराश हो जाता है।
🌾 4. टेक्नोलॉजी न
अपनाने के नुकसान
अब सवाल ये है कि टेक्नोलॉजी नहीं
अपनाने से क्या नुकसान है?
नुकसान बहुत बड़े हैं:
❌
उत्पादन कम
- कम पैदावार
- ज्यादा मेहनत
- कम मुनाफा
❌
समय की बर्बादी
हाथ से काम:
- ज्यादा समय
- ज्यादा थकान
मशीन से:
- कम समय
- ज्यादा काम
❌
मौसम पर निर्भरता
अगर बारिश देर से आई तो:
👉 फसल खराब
लेकिन टेक्नोलॉजी (ड्रिप/स्प्रिंकलर)
से पानी की समस्या कम हो सकती है।
❌
युवा खेती छोड़ रहे हैं
नई पीढ़ी कहती है:
👉 "खेती में मेहनत ज्यादा, पैसा कम"
अगर टेक्नोलॉजी आएगी तो खेती स्मार्ट
और आकर्षक बनेगी।
🚀 5. टेक्नोलॉजी से खेती
कैसे बदलेगी?
अगर किसान टेक्नोलॉजी अपनाए तो:
फायदे:
✅ कम मेहनत
✅ ज्यादा पैदावार
✅ कम खर्च
✅ ज्यादा मुनाफा
✅ समय की बचत
✅ स्मार्ट खेती
✅ युवा खेती में रुचि लेंगे
🌍 6. विदेशों से सीख
इज़राइल
- रेगिस्तान में भी खेती
- ड्रिप इरिगेशन
- पानी की बचत
अमेरिका
- बड़े ट्रैक्टर
- AI मशीनें
- ऑटोमेटिक खेती
जापान
- रोबोट खेती
अगर ये देश कर सकते हैं तो भारत क्यों
नहीं?
🛠 7. समाधान क्या है?
अब सबसे जरूरी बात —
समस्या का समाधान
✅
सरकार को क्या करना चाहिए?
- सस्ती मशीनें उपलब्ध कराना
- सब्सिडी बढ़ाना
- प्रशिक्षण देना
- हर गांव में टेक्नोलॉजी सेंटर
✅
किसानों को क्या करना चाहिए?
- नई जानकारी सीखें
- मोबाइल ऐप्स इस्तेमाल करें
- समूह बनाकर मशीन खरीदें
- सरकारी योजनाओं का लाभ लें
✅
युवाओं की भूमिका
युवा किसान:
- ड्रोन सीखें
- ऑनलाइन मंडी से जुड़ें
- डिजिटल खेती करें
🌟 8. भविष्य की खेती
कैसी होगी?
भविष्य में:
- ड्रोन दवाई छिड़केंगे
- मोबाइल से सिंचाई होगी
- सेंसर मिट्टी बताएंगे
- AI फसल की सलाह देगा
यानि:
👉 Smart Farming ही भविष्य है
📝 निष्कर्ष (Conclusion)
भारत में खेती में टेक्नोलॉजी जरूरी
नहीं मानी जाती क्योंकि:
- जमीन छोटी है
- पैसे की कमी है
- जानकारी कम है
- परंपरागत सोच है
लेकिन अगर हमें:
- किसान की आय दोगुनी करनी है
- देश को मजबूत बनाना है
- युवाओं को खेती से जोड़ना है
तो टेक्नोलॉजी अपनाना जरूरी है।
👉 “बदलाव ही प्रगति है”
आज नहीं तो कल, भारत की खेती को स्मार्ट बनना ही पड़ेगा।
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