शादी से पहले था कि एक अच्छी नौकरी होगी और उसके बाद शादी हो जाएगी कोई बात नहीं पर । आज क्या देखता हूं कि एक प्राइवेट नौकरी है दस हजार रूपये महीना। बीवी है बच्चे है चलों। ठीक है। पर खर्चें जिम्मेदारियां तो अच्छे से पूरी नहीं हो पा रही है।
सोचा था क्या ? और हो गया क्या ? विडंबना यह है कि आज बहुत ही परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। अगर बीवी समझदार हो तो जिंदगी खुशनुमा हो सकती है। पर पत्नी की बेहुदगीं से पूरा जीवन का सर्वनाश भी हो जाता है।
आज मेरी आयु 36 वर्ष हो चुकी है। पर आज तक गणित का सार मेरी समझ नहीं आया है।
एक बात तो तया है कि अगर अपने पल्ले कुछ ना हो ना भाई तो समझों जिंदगी नर्क ही है।
कोई साथ देने को तैयार ही नहीं है।
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